विषय: “अंतिम दिनों में धोखा और एंटीक्राइस्ट की आत्मा”
नमस्कार दोस्तों।
आज हम एक बहुत ही महत्वपूर्ण और गंभीर विषय पर बात करने जा रहे हैं।
यह विषय हर मसीही, हर परिवार, और हर विश्वासी के लिए अत्यंत आवश्यक है।
बाइबल हमें बताती है कि अंतिम दिनों में दुनिया में बहुत बड़ा भ्रम और बड़ा धोखा फैलने वाला है।
और वह समय अब हमारे सामने स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
आज हम उसी धोखे को पहचानना और समझना सीखेंगे।
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भाग 1 — प्रभु यीशु ने अंतिम दिनों के बारे में क्या बताया
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प्रभु यीशु ने मत्ती अध्याय 24 में कहा था:
“सावधान रहो, कि कोई तुम्हें न भरमाए।
बहुत से लोग मेरे नाम से आएंगे और कहेंगे कि वही मसीह हैं
और बहुत लोगों को भरमाएंगे।”
दोस्तों, प्रभु ने केवल युद्ध, भूकंप और महामारी की चेतावनी नहीं दी,
बल्कि सबसे बड़ा खतरा बताया — धोखा।
धोखा दिखाई नहीं देता।
धोखा धीरे-धीरे इंसान के विश्वास को नष्ट करता है।
और यही धोखा आज की दुनिया में बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
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भाग 2 — शैतान क्यों खतरनाक है?
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बाइबल कहती है कि शैतान कभी अपने वास्तविक रूप में नहीं आता।
वह हमेशा अपने आप को अच्छा, पवित्र, और प्रकाशमय दिखाता है।
2 कुरिन्थियों 11:14 में लिखा है:
“शैतान स्वयं ज्योतिर्मय स्वर्गदूत का रूप धर लेता है।”
इसका मतलब है कि शैतान लोगों को धोखा देने के लिए
पवित्रता का रूप पकड़ लेता है।
वह ऐसे लोगों को उठाता है जो आध्यात्मिक दिखते हैं,
लेकिन उनका उद्देश्य सत्य को नष्ट करना होता है।
इसीलिए बाइबल कहती है कि हर आत्मा पर विश्वास न करो,
बल्कि यह परखो कि वह परमेश्वर की ओर से है कि नहीं।
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भाग 3 — आज का एक बड़ा धोखा: स्वयंभू मसीहा
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आज एक मनुष्य दुनिया के सामने खुद को
“यीशु से बड़ा, दुनिया का सच्चा नेता और सच्चा मसीहा” कह रहा है।
उसका नाम है:
अब्दुल्ला हाशिम अब्बा अल-सदीक।
वह दावा करता है कि:
- यीशु ने अपनी भविष्यवाणियाँ पूरी नहीं कीं
- वही सच्चा मुक्तिदाता है
- प्रेरित पौलुस झूठे थे
- उसने एक नया धर्म शुरू किया है
- पूरी दुनिया को उसका अनुसरण करना चाहिए
दोस्तों, यह केवल एक मनुष्य का भ्रम नहीं है।
यह मसीह-विरोधी की आत्मा का काम है।
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भाग 4 — बाइबल ऐसे झूठों के बारे में क्या कहती है
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1 यूहन्ना 4:3 में लिखा है:
“जो आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह मसीह-विरोधी की आत्मा है… और अब जगत में है।”
यहूदा 1:4 कहता है:
“वे भक्तिहीन लोग हैं… जो हमारे प्रभु यीशु मसीह का इंकार करते हैं।”
अब्दुल्ला हाशिम:
- यीशु को परमेश्वर का पुत्र नहीं मानता
- बाइबल की कहानियों को बदलता है
- यीशु पर झूठे आरोप लगाता है
- और खुद को सच्चा मसीहा कहता है
बाइबल के अनुसार, उसकी आत्मा परमेश्वर की नहीं है।
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भाग 5 — उसकी शिक्षाओं के खतरनाक झूठ
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पहला झूठ:
वह कहता है कि यीशु असफल रहे।
लेकिन बाइबल कहती है कि यीशु ने हर भविष्यवाणी पूरी की।
दूसरा झूठ:
वह कहता है कि कैन, आदम का पुत्र नहीं था।
लेकिन उत्पत्ति अध्याय 4 में स्पष्ट लिखा है कि कैन आदम और हव्वा का पुत्र था।
तीसरा झूठ:
वह दावा करता है कि यीशु ने शादी की थी।
यह बात न बाइबल में है, न इतिहास में।
चौथा झूठ:
वह कहता है कि यीशु ने पाप किया।
लेकिन 1 पतरस 2:22 कहता है:
“उन्होंने कभी पाप नहीं किया।”
ऐसी बातें पूरी तरह एंटीक्राइस्ट की शिक्षा हैं।
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भाग 6 — शैतान ऐसी शिक्षाओं का उपयोग क्यों करता है?
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शैतान जानता है कि वह सीधे किसी विश्वासी से यह नहीं कह सकता
कि यीशु को छोड़ दो।
इसलिए वह झूठे शिक्षक उठाता है जो धीरे-धीरे सत्य को बदल दें।
वह कहता है:
- बाइबल सही नहीं है
- प्रेरित गलत थे
- यीशु सिर्फ एक सामान्य मनुष्य थे
- एक नया मसीहा आ गया है
इंटरनेट पर ऐसे झूठ बहुत तेजी से फैल रहे हैं,
और लोग बिना परखे उन्हें मान लेते हैं।
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भाग 7 — एक मसीही को क्या करना चाहिए?
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पहली बात: सत्य को जानो।
यदि आप बाइबल जानते हैं, तो आपको धोखा नहीं दिया जा सकता।
दूसरी बात: हर बात को परखो।
1 यूहन्ना 4:1 कहता है:
“हर आत्मा पर विश्वास न करो, परखो।”
तीसरी बात: परमेश्वर के हथियार बाँध लो।
इफिसियों 6 कहता है कि शैतान की युक्तियों के विरुद्ध खड़े रहने के लिए
हमें आत्मिक हथियार पहनने चाहिए।
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भाग 8 — हमें क्या समझना और करना चाहिए
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दोस्तों, समय कठिन है।
लेकिन डरने की जरूरत नहीं है।
हमारा परमेश्वर सामर्थी है।
वचन सत्य है।
और पवित्र आत्मा हमें मार्गदर्शन करता है।
हमें ये कदम अपनाने चाहिए:
- बाइबल का दैनिक अध्ययन
- प्रार्थना में स्थिर रहना
- झूठी शिक्षाओं से दूर रहना
- सत्य को दूसरों तक पहुँचाना
- यीशु के साथ अपने संबंध को मजबूत करना
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भाग 9 — निष्कर्ष
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दोस्तों, आज का यह संदेश केवल एक उद्देश्य के लिए है—
आपको जागरूक करना।
अंतिम समय में बहुत लोग उठेंगे
जो खुद को महान बताएंगे
और कई लोगों को धोखे में डाल देंगे।
लेकिन यदि आप सत्य को जानते हैं,
तो आप कभी नहीं डगमगाएँगे।
प्रभु यीशु ने कहा:
“तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।”
इसी सत्य में स्थिर रहो।
परमेश्वर आपको आशीष दे।
आमीन।
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